# जैन मिशन ## Posts - [गाय, बिल्ली और एक विगन की कहानी](https://jainmission.theywon.in/hindi-short-story-gaay-billi-vegan/): एक दिन अचानक उस घर में एक बिल्ली आ टपकी. दुबली-पतली, मासूम सी. किसान की पत्नी को उस पर दया आ गई. उसने एक कटोरी में दूध डालकर बिल्ली को पिला दिया. बस फिर क्या था, बिल्ली ने उसी घर को अपना ठिकाना बना लिया. धीरे-धीरे वह भी परिवार का हिस्सा बन गई. वैसे वह कोई काम नहीं करती थी, बस दिन में दो बार दूध पीती, धूप में आलस से फैलकर सोती और कभी-कभी म्याऊं-म्याऊं करके अपनी मौजूदगी दर्ज करा देती. - [हमारे जीवन में बार-बार रुकावटें क्यों आती हैं?](https://jainmission.theywon.in/reasons-of-obstacles/): इसका कारण बहुत स्पष्ट है. हमने कभी न कभी, इस भव में या पूर्व भव में, किसी न किसी के जीवन में, उसके कार्य में, उसके आगे बढ़ने के मार्ग में रुकावटें डाली हैं. किसी को रोकने का प्रयास किया है. किसी के मार्ग में कांटे बिछाए हैं. ईर्ष्या और जलन के भाव रखे हैं. यही अंतराय कर्म बनकर आज हमारे जीवन में रुकावट बनकर सामने आता है. - [दिगंबर श्वेताम्बर झगड़ते रहे, स्थानकवासी आगे निकल गए!](https://jainmission.theywon.in/they-moved-away/): आज जरूरत इस बात की है कि दिगंबर और श्वेतांबर समाज आत्ममंथन करें. यह समझें कि मंदिरों की संख्या बढ़ाने से समाज नहीं बढ़ता, बल्कि शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक व्यक्ति समाज को आगे ले जाते हैं. आडंबर कम हो, अहंकार टूटे, और ऊर्जा समाज निर्माण में लगे. नहीं तो इतिहास यही लिखेगा कि तुम आपस में झगड़ते रहे, और जो समय की समझ रखते थे, वे आगे निकल गए. - [घर–परिवार छोड़ा, पर महत्वाकांक्षाएं नहीं छोड़ी](https://jainmission.theywon.in/ghar-pariwar-chhoda-par/): अहंकार का यही रूप आगे चलकर असहिष्णुता बनता है. जो सच बोले, उसे धमकाना. जो प्रश्न करे, उसे विद्रोही ठहराना. और जो न झुके, उसके विरुद्ध झूठे मुकदमे गढ़ना—ये सब उसी अहंकार और महत्वाकांक्षा के परिणाम हैं, जिनका त्याग कभी हुआ ही नहीं. त्यागी वह है जो स्वयं को छोटा करे, न कि दूसरों को डराकर बड़ा बने. - [ध्यान किया नहीं जाता, हो जाता है!](https://jainmission.theywon.in/dhan-kiya-nahi-jata-ho-jata-hai/): सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ध्यान कोई क्रिया नहीं है जिसे किया जाए. आम तौर पर हमें कहा जाता है, इस पर ध्यान करो, उस पर ध्यान करो, इस चक्र पर ध्यान करो, दीये पर ध्यान करो, आंख बंद करके ध्यान करो. वास्तव में ये सभी विधियाँ एकाग्रता (Concentration) की हैं, ध्यान की नहीं. - [गुरु-शिष्य परंपरा से गुरु–भक्त परंपरा तक : जैन समाज की अवनति का मूल कारण](https://jainmission.theywon.in/guru-shishy-se-guru-bhakt/): गुरु–शिष्य परंपरा में शिष्य गुरु के दोष भी देखता था और उनसे सीख लेकर स्वयं को सुधारता था. गुरु भी जानता था कि शिष्य अंधा नहीं है, इसलिए उसे हर कदम सोच-समझकर रखना होता था. आज गुरु–भक्त परंपरा में भक्त गुरु के दोषों पर परदा डालता है, उन्हें सही ठहराने के तर्क गढ़ता है और जो व्यक्ति प्रश्न उठाए, उसे धर्मद्रोही घोषित कर देता है. इससे न गुरु सुधरता है और न समाज. - [मनुष्य की पीड़ा पर कब बोलेंगे जैन लोग?](https://jainmission.theywon.in/human-killings/): अगर अहिंसा केवल थाली और रसोई तक सीमित रह जाए, और युद्ध, हत्या व नरसंहार पर मौन साध लिया जाए, तो ऐसी अहिंसा खोखली बन जाती है. मुझे तो यह मानसिकता विचित्र लगती है. यह केवल अज्ञान नहीं, बल्कि एक तरह का मनोविकार भी है, जिसमें इंसान छोटी-छोटी बातों पर संवेदनशील और बड़ी-बड़ी हिंसाओं पर संवेदनहीन हो जाता है. - [साधुता की आड़ में सिद्धांतों की हत्या: महावीर के नाम पर सबसे बड़ा अपराध](https://jainmission.theywon.in/crime-in-the-name-of-mahaveer/): आज साधु का मूल्यांकन साधना से नहीं, प्रचार से होता है. जिसके पास माइक है, वही महान; जिसके पास कॅमेरा है, वही पूज्य. जो आडंबर पर प्रश्न उठाए, उसे विद्रोही कहा जाता है; जो चुपचाप पाखंड को स्वीकार करे, वही आदर्श घोषित होता है. यह कैसी साधुता है, जो प्रश्नों से डरती है? सत्य से भागने वाला साधु नहीं, व्यवस्था का कर्मचारी होता है. - [सामुदायिक विवाह आंदोलन: समय की जरूरत](https://jainmission.theywon.in/samudayik-vivah/): एक ही स्थान पर आयोजित होने वाले सामुदायिक विवाह समारोहों से समाज का पैसा सार्थक और पुण्य कार्यों में उपयोग हो सकता है. कोरोना काल में सीमित रिश्तेदारों की उपस्थिति में हुई शादियों को आदर्श उदाहरण के रूप में देखा गया था. उस समय 50 से 75 लोगों की मौजूदगी में सादगी के साथ, फिर भी पूरे उत्साह से विवाह संपन्न हुए. इससे यह स्पष्ट हो गया कि - [महावीर और उनके अनुयायी](https://jainmission.theywon.in/mahaveer-and-his-followers/): महावीर शोषण, गुलामी, हिंसा, झूठ, चोरी, परिग्रह जैसी बातो के खिलाफ थे. आजकल के जैन साधू और लोग सिर्फ हिंसा के खिलाफ ही बोलते है, बाकी सारी बातों को नजर अंदाज कर देते है. सच तो यह है की जैनियों को अहिंसा की बाते करने का कोई अधिकार नहीं है. अहिंसा तो शूर-वीरों के लिए होती है, कायरों के लिए नहीं. - [मोक्ष की बातें करने वाले सुन लो… पहले अपना भेद तो छोड़ो!](https://jainmission.theywon.in/moksh-ki-baten-karane-vale/): जैन दर्शन स्पष्ट कहता है कि राग–द्वेष ही बंधन का मूल कारण है. अब ईमानदारी से खुद से पूछो—दिगंबर और श्वेताम्बर का यह झगड़ा क्या राग–द्वेष नहीं है? अपने ही जैसे साधु, अपने ही जैसे श्रावक को सिर्फ वस्त्र, परंपरा या आचार की भिन्नता के कारण छोटा समझना क्या घोर मिथ्यात्व नहीं है? अगर तुम्हारा अहंकार यह मानने को तैयार ही नहीं कि सत्य अनेकांतात्मक है, तो मोक्ष तुम्हारे लिए केवल भाषण का विषय है, जीवन का लक्ष्य नहीं. - [नए ज़माने में नए जैन धर्म की ज़रूरत](https://jainmission.theywon.in/jainism-in-new-era/): आज जैन धर्म का मतलब बहुत हद तक खाने-पीने की पाबंदियों, लंबे उपवासों और कुछ खास नियमों तक सीमित हो गया है. कई बार ऐसा लगता है कि धर्म एक तरह की प्रतियोगिता बन गया है कि कौन ज़्यादा त्याग कर सकता है. लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इन सब से इंसान ज़्यादा अच्छा, ज़्यादा समझदार और ज़्यादा संवेदनशील बन रहा है या नहीं. अगर कोई बहुत धार्मिक दिखता है लेकिन दूसरों के दुख से उसे फर्क ही नहीं पड़ता, तो उस धर्म का क्या मतलब है. - [विगनिज़्म भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ख़त्म करने की एक साजिश है!](https://jainmission.theywon.in/rural-economy-of-india/): यह कहना अनुचित नहीं होगा कि विगनिज़्म को यदि व्यक्तिगत पसंद के रूप में अपनाया जाए, तो वह किसी का निजी अधिकार है. लेकिन जब उसे नैतिक श्रेष्ठता का दर्जा देकर पूरे समाज पर थोपने की कोशिश की जाती है, तब वह भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन परंपरा और आत्मनिर्भर जीवन–पद्धति के लिए एक गंभीर खतरा बन जाता है. इस संदर्भ में विगनिज़्म केवल एक आहार आंदोलन नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण ढांचे को कमजोर करने वाली एक वैचारिक साजिश जैसा प्रतीत होता है. - [ग्लोबल वॉर्मिंग, वीगन एक्टिविज़्म और एक वास्तविकता](https://jainmission.theywon.in/vegan-global-warming/): वैज्ञानिक अध्ययनों से साफ़ पता चलता है कि हम क्या खाते हैं, इससे पर्यावरण पर पड़ने वाला असर बहुत बदल जाता है. जो लोग मांस ज़्यादा खाते हैं, उनका कार्बन फुटप्रिंट सबसे ज़्यादा होता है. जब कोई व्यक्ति शाकाहारी बनता है, तो उसका पर्यावरणीय असर अपने-आप काफ़ी कम हो जाता है. और जो लोग पूरी तरह वीगन होते हैं, उनका असर और भी कम होता है. - [भगवान ऋषभदेव, अयोध्या और इक्ष्वाकु परंपरा](https://jainmission.theywon.in/bhagwan-rishabh-ayodhya-ikshwaku/): अयोध्या और उसके आसपास ऋषभदेव से संबंधित अनेक पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं. शाहजूरण का टीला, मणि पर्वत, अनंतनाथ की टोक, ग्रेवेयर और ब्लैकवेयर मृदभांड, 2400 वर्ष पुरानी जैन प्रतिमाएं, नंद वंश द्वारा निर्मित स्तूप, सातवीं से पंद्रहवीं शताब्दी की तीर्थंकर मूर्तियां इस परंपरा की ऐतिहासिकता को पुष्ट करती हैं. - [यीशु मसीह और जैन धर्म](https://jainmission.theywon.in/yeshu-masih-jain-dharm/): कुछ इतिहासकार मानते है की यीशु मसीह अपनी युवावस्था में आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए भारत आए थे. इस मान्यता के अनुसार, यीशु मसीह अपने जीवन के उन समयों में भारत आए होंगे, जिनका विवरण बाइबिल में नहीं मिलता. यीशु की शिक्षाएं—जैसे प्रेम, करुणा, क्षमा, सरल जीवन और अहिंसा—भारत की आध्यात्मिक परंपराओं, जैसे जैन धर्म और बौद्ध धर्म, से काफी मिलती-जुलती हैं. - [वेगन दलीलें और जैन सिद्धांत](https://jainmission.theywon.in/vegan-arguements-and-jainism/): यह लेख न तो वेगनवाद के खिलाफ है और न ही डेयरी के पक्ष में. इसका मक़सद बस यह समझना है कि कैसे दार्शनिक विचारों को कभी-कभी अपनी सुविधा के हिसाब से लिया जाता है, और यह भी कि सही संवाद तभी हो सकता है जब बात पूरे संदर्भ में रखी जाए. - [जैन धर्म की प्राचीनता: विख्यात विद्वानों के मत](https://jainmission.theywon.in/antiquity-of-jainism/): ‘सिन्धु घाटी की अनेक सीलों में उत्कीर्ण देवमूर्तियां न केवल बैठी हुई योगमुद्रा में हैं और सुदूर अतीत में सिन्धु घाटी में योग के प्रचलन की साक्षी है अपितु खड़ी हुई देवमूर्तियां भी हैं जो कायोत्सर्ग मुद्रा को प्रदर्शित करती है… - [अहिंसा : नियम की नहीं, समझ की जरूरत](https://jainmission.theywon.in/understanding-ahimsa/): वास्तविक हिंसा का मूल कारण बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि हमारे भीतर पैदा होने वाला राग है. जब हमारे मन में किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थिति को पाने की तीव्र इच्छा जन्म लेती है, तभी हम उसे पाने के लिए क्रिया करते हैं. किसी इच्छा को पूरा करने के लिए की गई हर क्रिया में कहीं न कहीं हिंसा छिपी रहती है. - [शाकाहारी लोगों को वेगन नहीं बनना चाहिए](https://jainmission.theywon.in/say-no-to-veganism/): बच्चों के लिए तो यह और भी खतनाक है. उनकी हड्डियां, दिमाग और शरीर बहुत तीव्र गति से बढ़ते हैं. उन्हें प्रचुर प्रोटीन, कैल्शियम और स्वस्थ फैट की जरूरत होती है. वेगन डाइट देने से उनके विकास में रुकावट, कमजोरी और कई बार स्थायी नुकसान का खतरा रहता है. - [वेगनिज़्म के नाम पर जैनों को निशाना बनाना बंद करो](https://jainmission.theywon.in/jainism-veganism/): अगर पशु अधिकार की बात करने वालों में उतना साहस है जितना वे दिखाते हैं, तो वे जाएं उस विशाल बहुमत के पास जो भारी मात्रा में डेयरी का सेवन करता है, उन मांस–भक्षी समूहों के पास जिनके लिए करोड़ों जानवरों की हत्या होती रहती है, उन उद्योगों तक जो चमड़ा, रेशम, शहद, जिलेटिन और पशु-परिक्षित सौंदर्य प्रसाधनों पर चलते हैं. वास्तविक क्रूरता वहीं है. - [क्या वैदिक धर्म के विरोध में हुआ जैन धर्म का उदय?](https://jainmission.theywon.in/vaidik-dharm-jain-dharm/): महावीर सांगलीकर जैन धर्म के बारे में फैलाया गया सबसे बड़ा झूठ: सदियों से एक बात बार-बार कही जाती है कि “जैन धर्म की उत्पत्ति वैदिक धर्म में होने वाली हिंसा—विशेषकर यज्ञों में पशुबली—के विरोध में हुई.” यह धारणा कुछ इतिहासकारों और लेखकों ने बिना गहराई से अध्ययन किए लिखी और धीरे-धीरे यह मान्यता बन गई कि यह इतिहास का ‘स्वीकार्य सत्य’ है. लेकिन गंभीर अध्ययन, पुरातत्व, भाषावैज्ञानिक शोध, और भारत की वैदिक–पूर्व आध्यात्मिक परंपराएं यह बताती हैं कि यह दावा सिर्फ गलत ही नहीं, बल्कि भ्रामक और जैन धर्म के मूल स्वरूप को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने वाला है. जैन […] - [कहानी | एक जैन लड़की से प्यार](https://jainmission.theywon.in/jain-ladki-se-pyar/): फिर एक दिन मैंने उससे कहा, “चलो, कल हम कॉलेज से छुट्टी लेते हैं, और लंच के लिए जाते हैं.” उसने मेरी ओर विचित्र नजरों से देखते हुए कहा, “मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए आती हूं, कॉलेज के नाम पर बाहर घूमने के लिए नहीं.” और वह तुरंत क्लास की ओर चली गई. - [भगवान महावीर के HD चित्र | Bhagwan Mahaveer HD Images](https://jainmission.theywon.in/bhagwan-mahaveer-images/): इमेज डेस्क टॉप या लॅप टॉप पर डाउनलोड करने के लिए राइट क्लिक कीजिये, और फिर डाउनलोड पर क्लिक कीजिये. मोबाईल फोन पर डाउन लोड करने के लिए इमेज को गॅलरी में सेव कीजिये. To download an image on a desktop or laptop, right-click and then click download. To download on a mobile phone, just save it in the gallery. - [जैन धर्म का बढ़ता प्रभाव और उसका लाभ](https://jainmission.theywon.in/influence-of-jainism/): जैन समाज का प्रभाव और प्रतिष्ठा हर क्षेत्र में बढ़ गई है. जैन युवक और युवतियां हर क्षेत्र में बड़ा काम कर रहें हैं. पूरे देश में हजारों जैन साधु-साध्वी समाज को मार्गदर्शन दे रहे हैं और लोगों को सन्मार्ग पर चलना सीखा रहें हैं. इसलिए जो लोग पहले जैनों को अनदेखा करते थे, वे भी अब (चाहे मजबूरी से ही सही) जैन समाज और जैन धर्म की ओर ध्यान देने लगे हैं. - [णमोकार मंत्र का इतिहास](https://jainmission.theywon.in/history-of-namokar-mantra/): संपूर्ण णमोकार मंत्र सबसे पहले भद्रबाहु द्वारा लिखित कल्पसूत्र में मिलता है. इससे पहले प्रतीत होता है कि यह मंत्र क्रमशः विकसित हो रहा था, या फिर शिलालेखों में स्थान की कमी के कारण इसे संक्षिप्त रूप में ही अंकित किया जाता था. लेकिन कल्पसूत्र में आज जो पूरा मंत्र बोला जाता है—वही उसी रूप में मिलता है, जैसा ऊपर दिया गया है. 1933 में बनस्थली में प्रकाशित कल्पसूत्र की प्रतियों से भी यह स्पष्ट होता है कि णमोकार मंत्र का पूर्ण विकसित स्वरूप उसमें उपलब्ध है. - [मैंने मंदिर जाना छोड दिया](https://jainmission.theywon.in/mandir/): उस दिन से आज तक मैं किसी मंदिर में गया नहीं. आगे भी कभी नहीं जाऊंगा. मैं नहीं चाहता कि मैं भी उनके जैसा बनूं. वैसे भी मंदिर जाना जैन धर्म में जरूरी बात नहीं है. अगर यह जरूरी बात होती, तो जैन धर्म में मंदिर और मूर्तिपूजा को न मानने वाले सम्प्रदाय नहीं होते. - [रावण : श्रमण संस्कृति का साधक और रक्षक](https://jainmission.theywon.in/ravan-shraman-sanskriti-ka-sadhak/): यह एक रोचक तथ्य है कि जिन हिंदी प्रदेशों में सामंती प्रथा और धार्मिक लुटेरों का वर्चस्व अधिक था, वहीं रावण के सबसे अधिक पुतले जलाए जाते हैं. जबकि दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और पश्चिमी भारत के अधिकांश क्षेत्रों में दशहरा तो मनाया जाता है, लेकिन रावण-दहन प्रायः नहीं होता. - [मुग़ल काल में जैन धर्म और समाज](https://jainmission.theywon.in/jains-and-jainism-in-mughal-era/): मुगलों के प्रभाव से जैन मंदिरों पर गुमट और मंदिरों के भीतर मुग़ल कुम्भी और भित्तिचित्र दिखाई देने लगे. दूसरी और फारसी कविताओं में जैन नैतिक मूल्यों को शामिल किया गया. मुग़ल बादशाहों पर, विशेष कर बादशाह अकबर पर जैन सिद्धांतो का प्रभाव पड गया था. दूसरी और जैन समाज के व्यक्ति नामों पर मुगलों का प्रभाव पड गया. जैसे फ़तेह चंद, मेहताब चंद आदि. शाह यह सरनेम, जो विशेष कर गुजरात के जैन समाज में पाया जाता है, मूल रूप से एक पर्शियन टायटल है. - [जैन धर्म पुराना है या हिन्दू धर्म? क्या वैदिक धर्म जैन धर्म से भी प्राचीन है?](https://jainmission.theywon.in/jain-dhamr-ki-prachinata/): हमें अपने धर्म के प्राचीनता के बारे में नहीं बल्कि वर्तमान और भविष्य के बारे में सोचना चाहिये. मान लिया कि आपका धर्म दुनिया में सबसे प्राचीन है, आदिमानव भी इसका पालन करते थे, लेकिन क्या आप अपने धर्म का पालन करते है? क्या आपको अपने धर्म की बुनियादी जानकारी है? क्या आपकी अगली पीढ़ियां इसका पालन करने वाली हैं? - [जैन मिशन वेबसाइट के लिए लेख, कहानियां, समाचार भेजिए](https://jainmission.theywon.in/write-for-jain-mission/): यदि आप एक सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक, लेखक, या जैन धर्म और समाज में रुचि रखने वाले व्यक्ति हैं, तो हम आपको जैन मिशन वेबसाइट के लिए लेख, समाचार, और अन्य उपयोगी जानकारी भेजने के लिए आमंत्रित करते हैं. आप ऊपर दिए गए किसी भी विषय पर, और संबंधित अन्य विषयों पर लिख सकते हैं: - [धार्मिक स्थलों के दस्तावेज और अल्पसंख्यकों की सुविधाओं पर जन-जागरूकता](https://jainmission.theywon.in/jain-religious-places/): आज भारत सरकार धार्मिक स्थलों की संपत्तियों और उनके कानूनी अधिकारों को गंभीरता से देख रही है. यदि किसी मंदिर, स्थानक या तीर्थ की जमीन के स्पष्ट दस्तावेज नहीं हैं, तो ऐसी संपत्तियां सरकार द्वारा अधिग्रहित की जा सकती हैं. यह स्थिति विशेष रूप से जैन समाज के लिए चिंताजनक है क्योंकि हमारे कई तीर्थस्थल और मंदिर सदियों पुराने हैं, जिनके दस्तावेज समय के साथ नष्ट हो गए या खो गए हैं. - [दिगंबर-श्वेतांबर विवाह: समय की पुकार](https://jainmission.theywon.in/digambar-shwetambar-marriages/): आधुनिक युग में सामजिक तौर पर दिगंबर और श्वेताम्बर समाज के बीच की खाई कम हो रही है. (भले ही कुछ कलहप्रिय और कट्टरतावादी लोग इस खाई को बढाने की कोशिश करते रहते हैं ). इस खाई को और कम करने के लिए एक अच्छा उपाय यह है कि दिगंबर और श्वेताम्बर समाज में आंतर-सांप्रदायिक विवाह को बढ़ावा मिले. - [Online Jain Library |ऑनलाइन जैन लायब्ररी | Jain Books](https://jainmission.theywon.in/online-jain-library/): जैन ई-लायब्ररी एक ऐसी वेबसाइट (ऑनलाइन लायब्ररी) है, जहां आपको मिलेंगे जैन ग्रंथ, जैन शब्दकोश, जैन ज्ञानकोश, जैन लेख, जैन पात्र-पत्रिकायें और प्राचीन तथा समकालीन गुजराती, हिन्दी और अंग्रेजी जैन भाषा की पुस्तकें. इस ऑनलाइन लायब्ररी में श्वेतांबर शास्त्र, दिगंबर शास्त्र, चार अनुयोग, भाष्य साहित्य, प्राकृत-संस्कृत साहित्य के साथ आधुनिक और प्राचीन साहित्य का अद्भूत संगम देखने को मिलेगा - [जैन ओबीसी और जैन मायनॉरिटी | Jain OBC and Jain Minority](https://jainmission.theywon.in/jain-obc-minority/): ओबीसी का मतलब है Other Backward Caste. यह जाति पर आधारित है, न कि धर्म पर. जैन समाज की जो जातियां सामाजिक रूप से पिछड़ी हुई हैं, ऐसी कुछ जातियों को ओबीसी का दर्जा दिया गया है. ऐसी जातियों के लोग एक तरफ ओबीसी के लाभ पा सकते हैं, दुसरी तरफ मायनॉरिटी के लाभ भी पा सकते हैं. - [जातीय जनगणना और जैन समाज](https://jainmission.theywon.in/caste-census-jain/): कुछ जैन लोग ऐसा प्रचार कर रहे हैं कि जैनियों को जाति के कॉलम में भी जैन लिखना चाहिए. यह एक निहायत ही गलत बात है. कॉमन सेन्स की बात यह है कि जिधर जो पूछा गया है वही लिखना चाहिए. उससे भी बडी बात यह है कि जैन कोई जाति नहीं है, बल्कि एक धर्म है. जैन को जाती बताना या बनाना मूर्खता तो है ही, साथ ही यह घोर अज्ञान है. - [जैन जातियों की सूचि | List of Jain Castes | जैन समाज](https://jainmission.theywon.in/list-of-jain-castes/): भारत सरकार के भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण इस संस्था ने किये हुए सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 120 से अधिक समुदाय ऐसे है जो जैन धर्म का पालन करते हैं. मैंने वह सूचि तो देखी नहीं है. मैंने जो सूचि बनाई है वह मेरे सामजिक ज्ञान और प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष संपर्क के आधार पर बनाई है. ध्यान रहें की यह सूचि अधूरी है, और इनके अलावा भी कई समुदाय हैं, जो जैन धर्म का पालन करते हैं. अगर आप ऐसा कोई समुदाय जानते हैं तो कृपया उसका नाम निचे कॉमेंट बॉक्स में लिखे. - [आचार्य विजयानंद सूरी: एक महान जैन विद्वान और सुधारक](https://jainmission.theywon.in/acharya-vijayanand-suri/): उनके समय में कई जैन मंदिर जीर्ण-शीर्ण हो गए थे. आचार्य विजयानंद सूरी ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण जैन मंदिरों के पुनर्निर्माण और मरम्मत का कार्य करवाया. उन्होंने जैन समाज में तीर्थयात्रा की परंपरा को पुनर्जीवित करने में भी योगदान दिया और लोगों को अपने पवित्र स्थलों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया. - [जैन दर्शन का सार](https://jainmission.theywon.in/jain-darshan/): जैन दर्शन आत्मा की स्वतंत्रता को महत्व देता है, इसलिए विवेक आधारित जीवन को ही श्रेष्ठ माना गया है.बाहरी अनुशासन में डर, दबाव या परंपरा होती है. लेकिन विवेक से किया गया कार्य स्वतःस्फूर्त होता है और टिकाऊ होता है. विवेक आत्मा की जागरूकता से आता है. - [खतरे में है जैन समाज का भविष्य](https://jainmission.theywon.in/jain-samaj-ka-bhavishya/): जैन समाज अपना भविष्य सुरक्षित देखना चाहता है, अपनी भावी पीढ़ी को फलते-फूलते हुए देखना चाहता है तो समाज को गहरे चिंतन मनन की आवश्यकता है. सबसे पहले तो जैन समाज में विवाह अधिक हो उपरांत जन्म दर बढ़े, हमारी बढ़ती जनसंख्या हमारे समाज का वोट बैंक स्ट्रॉन्ग करेगी जिससे हम इतर धर्म के सामने खड़े हो पाएंगे, उनसे दो दो हाथ कर पायेंगे, अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को बचा पाएंगे, सरकार के सामने अपनी तकलीफ रख पाएंगे, अपने काम सरकार से निकलवा पाएंगे और सबसे महत्त्वपूर्ण बात चैन से जी पाएंगे. - [बिना साधुओं और बिना मंदिरों का जैन समाज](https://jainmission.theywon.in/jainism-without-temples/): जैन समाज में बडी  संख्या में ऐसे लोग हैं जो ना मंदिर जाते हैं और ना ही साधुओं के पास जाते हैं. फिर भी उनमें से अधिकतर लोग अपने अपने विचारों के अनुसार जैन धर्म का व्यवस्थित पालन करते हैं. इन लोगों का कोई अलग संप्रदाय नहीं हैं, ऐसे लोग जैन समाज के हर संप्रदाय में देखे जाते हैं.   - [क्यों विगन्स को जैन धर्म अपनाना चाहिए?](https://jainmission.theywon.in/vegans-jainism/): कई विगन्स अपनी जीवनशैली में पहले से ही जागरूकता का पालन करते हैं, लेकिन जैन धर्म एक व्यवस्थित मार्ग प्रदान करता है जो आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देता है. ध्यान, आत्म-अनुशासन और अनावश्यक विलासिता से दूर रहकर जैन लोग आंतरिक शांति और आत्म-जागरूकता विकसित करते हैं. यह उन विगन्स के लिए एक स्वाभाविक प्रगति हो सकती है जो भोजन से परे एक गहरे उद्देश्य की खोज कर रहे हैं. - [आचार्य शांतिसागर: दिगंबर मुनि परंपरा के अग्रदूत](https://jainmission.theywon.in/acharya-shantisagar/): आचार्य शांतिसागर जी ने जैन धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्हें "चरित्र चक्रवर्ती" (सद्गुणों के सम्राट), "मुनिराज" (साधुओं के राजा) और "शीलसिंधु" (आचरण का महासागर) जैसी उपाधियां दी गईं. उन्होंने जैन अनुयायियों के बीच धार्मिक जागरूकता बढ़ाई और दिगंबर मुनि परंपरा को पुनर्स्थापित किया. - [भामाशाह: महाराणा प्रताप के सच्चे साथी](https://jainmission.theywon.in/bhamashah-trusted-general-of-maharana-pratap/): भामाशाह का जन्म 29 अप्रैल 1547 को एक प्रतिष्ठित ओसवाल जैन परिवार में हुआ था. उनके पिता भारमल मेवाड़ के राजा उदय सिंह द्वितीय के अधीन कोषाध्यक्ष और रणथंभौर किले के शासक थे. बचपन से ही भामाशाह को वफादारी, सेवा और आर्थिक प्रबंधन के मूल्य सिखाए गए, जो आगे चलकर उनके प्रशासनिक और सैन्य कार्यों में काम आए. उनके छोटे भाई ताराचंद भी मेवाड़ के लिए समर्पित थे. - [वनराज चावडा: जैन धर्म के संरक्षक राजा](https://jainmission.theywon.in/vanraj-chavda/): वनराज चावडा का जीवन शुरुआत से ही संघर्षों से भरा था. कई ऐतिहासिक ग्रंथों, जैसे कि कृष्णभट्ट की रत्नमाला और मेरुतुंग की प्रबंध चिंतामणि में उनके जन्म और संघर्षों का जिक्र मिलता है. एक कथा के अनुसार, उनके पिता जयशेखर, जो पंचसर के राजा थे, को उनके दुश्मन राजा भुवड ने - [यापनीय संप्रदाय: जैन धर्म का भूला-बिसरा अध्याय](https://jainmission.theywon.in/yapaniya-jainism/): यापनीय संप्रदाय जैन धर्म के इतिहास का एक रोचक अध्याय है, जो जैन परंपराओं में विविधता और लचीलेपन को दर्शाता है. यह संप्रदाय आज भले ही स्वतंत्र रूप से मौजूद न हो, लेकिन इसका प्रभाव जैन साहित्य, मुनि परंपराओं और दार्शनिक चर्चाओं में देखा जा सकता है. यापनीयों ने जैन धर्म की विभिन्न धाराओं को जोड़ने और दोनों प्रमुख संप्रदायों के बीच सामंजस्य स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. - [दर्शन पाठ (संस्कृत), हिंदी अनुवाद के साथ](https://jainmission.theywon.in/darshan-paath/): दर्शनं देवदेवस्य, दर्शनं पापनाशनम्। दर्शनं स्वर्गसोपानं, दर्शनं मोक्षसाधनम्॥(1) दर्शनेन जिनेन्द्राणां, साधूनां वन्दनेन च। न चिरं तिष्ठते पापं, छिद्रहस्ते यथोदकम्॥(2) - [दलित और आदिवासियों को जैन धर्म अपनाना चाहिए!](https://jainmission.theywon.in/dalit-adivasi-jain/): ऐसे दलित और आदिवासियों के लिए जैन धर्म एक श्रेष्ठ विकल्प हो सकता है. जैन धर्म एक शांतिपूर्ण, अहिंसक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित धर्म है, जिसमें जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता. इस धर्म को अपनाने से न केवल उनकी जीवनशैली में सुधार होगा, बल्कि वे एक शांतिपूर्ण और व्यसनमुक्त समाज की ओर अग्रसर होंगे. - [सम्प्रदायवाद ले डूबेगा जैन समाज को!](https://jainmission.theywon.in/sampradayvaad/): वास्तव में सम्प्रदायवाद कलहप्रियता का लक्षण है. कलहप्रियता एक मानसिक विकृति है. इसका सीधा मतलब यह है कि सम्प्रदायवादी लोग मनोरुग्ण हैं, इस बात को अच्छी तरह जान लेना चाहिए. - [धार्मिक कट्टरतावाद | हर धर्म खतरे में !](https://jainmission.theywon.in/kattartavaad/): हर धर्म के कट्टरतावादी अनुयायी मानते हैं की उनका धर्म विज्ञान के अनुसार है. भले ही यह अनुयायी विज्ञान क्या है और उनका धर्म क्या है इन दोनों बातों से अपरिचित होते हैं. धार्मिक लोग विज्ञान के सभी फायदे लेते रहते हैं, लेकिन उनकी मानसिकता विज्ञान विरोधी होती है. - [जैन समाज क्या है? इसका सही स्वरुप जानिये!](https://jainmission.theywon.in/jain-community/): जैन का मतलब होता है वह व्यक्ति, जो जैन धर्म का पालन करता है. जिस समाज में जैन धर्म का पालन करने वालों की संख्या बहुत ही ज्यादा है, उसे जैन समाज कहा जाता है. भारत के लगभग हर प्रदेश में, हर भाषा-भाषी लोगों में जैन धर्म का पालन करने वाले समूह पाए जाते हैं. - [भाग्यशाली तो वह है जो कर्म से जैन होते हैं...](https://jainmission.theywon.in/karm-se-jain/): मनुष्य जन्म नहीं बल्कि कर्म से महान बनता है. इसी प्रकार मनुष्य जन्म से नहीं बल्कि आचरण से जैन बनता है. इसलिए जैन कुल में जन्म लेने वाले व्यक्ति को भाग्यशाली मानना ठीक नहीं है. फिर भी ऐसा माना जाता है. इसके पीछे क्या कारण है? इसका उत्तर यह है कि जैन परिवार में जन्म लेनेवाले व्यक्ति पर जैन धर्म के अनुसार आचरण करने के संस्कार हो जाते हैं. इसलिए उस व्यक्ति को भाग्यशाली माना जाता है. - [मातंग वंश और जैन धर्म](https://jainmission.theywon.in/matang-vansh/): मातंग वंश का इतिहास गौरवशाली और प्राचीन है, लेकिन इसपर ज्यादा शोध कार्य नहीं हुआ है. जो कुछ शोधकार्य हो गया है है वह बौद्ध और वैदिक परंपरा के साहित्य पर आधारित है. इस लेख में मैं प्राचीन जैन साहित्य के आधार पर मातंगों के इतिहास पर प्रकाश डालूंगा और वर्तमान में मातंग समाज की स्थिति के बारे में कुछ बातें लिखूंगा. - ["जय जिनेन्द्र" की शुरुआत कब हुई?](https://jainmission.theywon.in/history-of-jai-jinendra/): 634 ईस्वी के एक शिलालेख में "जय जिन" लिखा मिलता है, जो "जय जिनेन्द्र" जैसा ही है. यह शिलालेख कर्नाटक के मेगुति मंदिर की दीवार पर खुदा हुआ है. इसे जैन कवि रविकीर्ति ने चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय की प्रशंसा में लिखा था. - [वेश्या व्यवसाय: मानव तस्करी रोकने के लिए एक जैन साध्वी ने की पहल](https://jainmission.theywon.in/human-trafficking/): दुनियाभर में वेश्याव्यवसाय के लिए लाखों युवतियों का अपहरण किया जाता है. इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए साध्वी सिद्धाली श्री ने Stopping Traffic इस मुव्हमेंट की शुरुआत की. Stopping Traffic इस डॉक्युमेन्ट्री फिल्म का निर्माण किया जिसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, और जिसे लाखों लोगों ने देखा. इस डॉक्युमेन्ट्री में भगवान महावीर का सन्देश और णमोकार मन्त्र भी दिया गया है. - [जैन युवकों को सेनाओं में शामिल होना चाहिए….](https://jainmission.theywon.in/jains-in-armed-forces/): भारतीय सेना में जैन समाज की भागीदारी कोई नयी बात नहीं है. हमारे इतिहास में कई उदाहरण हैं, जब जैन योद्धाओं, सेनापतियों और नायकों ने राष्ट्र की रक्षा और गौरव को बनाए रखा. हजारों वर्षों से जैन समाज ने भारत को महान योद्धा, प्रशासक और सैनिक प्रदान किए हैं. - [जाट समाज और जैन धर्म](https://jainmission.theywon.in/jainism-in-jats/): आधुनिक काल में जाटों में जैन धर्म के अनुयायी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. इन्हें 'जैन जाट' या 'जाट जैन' कहा जाता है. इनमें से कुछ लोग अपना सरनेम जैन लिखते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग अपना गोत्र आदि लिखते हैं, जैसे कि चहल, चौधरी, दहिया आदि. जैन जाटों और हिन्दू जाटों में विवाह होना एक आम बात है. - [दिगंबर जैन समाज आत्मपरीक्षण करें ……..](https://jainmission.theywon.in/digambar-jain-samaj/): खैर, दिगंबर जैन समाज के नेता और मुनि, और साथ में श्रावक भी, चाहे वह दक्षिण के हो या उत्तर के, इनमें साम्प्रदायिक कट्टरता कूट-कूट कर भरी होती है. विशाल दृष्टिकोण का अभाव होता है. यह लोग अजैन लोगों से तो टूटू ही गए हैं, साथ ही जैन समाज के अन्य सम्प्रदायों से भी टूट गए हैं. - [महाराष्ट्र का जैन कासार समाज](https://jainmission.theywon.in/jain-kasar/): जैन कासार समाज महाराष्ट्र के जैन समाज का एक महत्व पूर्ण हिस्सा है. यह समाज पूरे महाराष्ट्र में दिखाई देता है, फिर भी दक्षिण महाराष्ट्र के कोल्हापूर, सांगली और सोलापूर तथा कोंकण के रत्नागिरी और सिंधूदुर्ग इन जिलों में संख्या बडी है. इन जिलों के अलावा मुंबई और पुणे जैसे बडे शहरों में, मराठवाडा के कई जिलों में इनकी संख्या अच्छी-खासी है. - [भक्तामर स्तोत्र (संस्कृत)| Bhaktamar Stotra](https://jainmission.theywon.in/bhaktamar-stotra/): भक्तामर स्तोत्र का जैन धर्म में बडा महत्व है. आचार्य मानतुंग का लिखा भक्तामर स्तोत्र सभी जैन परंपराओं में सबसे लोकप्रिय संस्कृत प्रार्थना है - [साध्वी सिद्धाली श्री: आध्यात्मिकता और सामाजिक सक्रियता का संगम](https://jainmission.theywon.in/sadhvi-siddhali-shree-2/): एक आध्यात्मिक नेता के रूप में, साध्वी सिद्धाली श्री का दुनिया भर में अपने अनुयायियों पर गहरा प्रभाव है. उनकी शिक्षाएं सांस्कृतिक और धार्मिक सीमाओं से परे हैं, उन व्यक्तियों को आकर्षित करती हैं जो शांति, करुणा और उद्देश्यपूर्ण जीवन का मार्ग खोज रहे हैं. वह अक्सर कार्यशालाएं, संगोष्ठियां और ध्यान रिट्रीट आयोजित करती हैं, व्यक्तिगत और आध्यात्मिक विकास के लिए व्यावहारिक उपकरण प्रदान करती हैं. - [उवसग्गहरं स्तोत्र अर्थसहित (Jain Stotra)](https://jainmission.theywon.in/uvasaggharam-stotra/): जिन करुणाकर आचार्य भद्रबाहु के संघ द्वारा संघ के कल्याणकारक यह उवसग्गहरं स्तोत्र निर्मित किया गया हैं, वे गुरु भद्रबाहु सदा जयवन्त हों. - [क्या जैन हिन्दू है? Jain & Hindu](https://jainmission.theywon.in/jain-and-hindu/): भारत के किसी भी प्राचीन धार्मिक या अन्य साहित्य में हिंदू इस शब्द का प्रयोग धर्म के अर्थ में किया नहीं गया है. वास्तव में हिंदू यह शब्द एक प्रदेश वाचक शब्द है. इस शब्द का संबंध सिंधू इस शब्द से और सिंधू घाटी की सभ्यता से है. अरबी और फारसी भाषा में हिंदू शब्द का अर्थ प्रदेश वाचक ही है. हिंदू शब्द का सीधा-साधा अर्थ 'भारतवासी' या 'हिंदुस्थानी' यही है! - [जैन समाज की घटती हुयी आबादी ….](https://jainmission.theywon.in/jain-population/): महावीर सांगलीकर jainway@gmail.com जैन समाज की घटती हुयी आबादी जैन धर्म के अनुयायीयों की घटती हुयी आबादी एक चिंता का विषय है. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जैन समाज की संख्या लगभग 45 लाख है. यह भारत की कुल जनसंख्या में केवल 0.37% है, मतलब आधा प्रतिशत भी नहीं. जैन आबादी को बढाने के लिए कुछ लोग जैन समाज से अपील करते है कि हर जैन पति-पत्नी को दो से अधिक बच्चे पैदा करने चाहिए. लेकिन ऐसा हो ही नहीं सकता, क्यों कि आबादी का नियम यह है कि जिस समाज में संपन्नता और शिक्षा का प्रमाण जादा […] - [णमोकार मंत्र की विशेषताएं](https://jainmission.theywon.in/navkar-mantra/): इस मंत्र की एक विशेषता यह भी है कि इसमें किसी प्रकार की याचना नहीं की गई है. केवल निःस्वार्थ भाव से पंच परमेष्ठी के प्रति भक्तिभाव प्रकट किया गया है. - [मेरी भावना | Jain Prayer](https://jainmission.theywon.in/meri-bhavana/): मैत्री भाव जगत में मेरा सब जीवों से नित्य रहे दीन-दुखी जीवों पर मेरे उर से करुणा स्रोत बहे दुर्जन क्रूर - कुमार्गरतों पर, क्षोभ नहीं मुझको आवे साम्यभाव रखूं मैं उन पर, ऐसी परिणति हो जावे - [जैन मंदिरों का परिवर्तन क्यों हुआ?](https://jainmission.theywon.in/conversion-of-jain-temples/): ढेर सारे जैन मंदिरों का हिंदू मंदिरो में परिवर्तन हुआ इसके पीछे के असली कारण क्या है इसपर हम कब चर्चा करेंगे? देखा जाता है की ऐसे परिवर्तन ज्यादातर उन प्रदेशों में हुए जहां जैन समाज का अस्तित्व समाप्त हो गया था. अगर वहां जैन समाज ही नहीं बचा तो मंदिर कैसे बचते? - [Jain Surname: जैन सरनेम की वास्तवता](https://jainmission.theywon.in/jain-surname/): सरनेम अपने पारिवारिक कुल की पहचान होती है और होनी चाहिए, न कि धर्म की पहचान. केवल जैन सरनेम लगाने से आप जैन नहीं बनते. आपके जैनत्व की पहचान आपके आचरण से होती है और होनी चाहिए. - [जैन हो फिर भी दुखी हो?](https://jainmission.theywon.in/dukhi-jain/): क्या तुम्हें सभी जैनियों से अपनापन है? उनसे दोस्ती है? उनसे पारिवारिक संबध हैं? क्या जरुरत पड़ने पर तुम उनकी मदद करते हो? चाहे वह किसी भी संप्रदाय, भाषाभाषी, जाति के हो? और जैन समाज की कोई व्यक्ति राह भटकती है तो क्या तुम उसे सही रस्ते पर लाने की कोशिश करते हो? या फिर उसे और बदनाम करते रहते हो? - [दक्षिण भारत में धार्मिक संघर्ष: क्या यह जैन-हिन्दू संघर्ष था?](https://jainmission.theywon.in/jain-hindu-conflicts/): वास्तवता यह है कि उस समय हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं था और हिंदू इस शब्द का प्रयोग किसी भी धर्म के लिए प्रचलित नहीं हुआ था. इसलिए जैन-शैव या जैन-वैष्णव संघर्ष को जैन और हिन्दुओं के बीच का संघर्ष कहना एक बड़ी गलती है. यह गलती कई जैन विद्वान करते हैं, और कई हिन्दू विद्वान् भी करते है. उधर बौद्ध विद्वानों ने भी शैव-बौद्ध और वैष्णव-बौद्ध संघर्ष को बौद्ध-हिन्दू संघर्ष के रूप में प्रस्तुत किया है. - [राजपूत और जैन धर्म](https://jainmission.theywon.in/rajput-jain/): वैसे तो राजस्थान और पडोसी राज्यों में जैन धर्म का इतिहास 2500 वर्ष पूर्व तक जाता है, लेकिन इस प्रदेश में जैन धर्म का विकास राजपूत काल में तेजी से हुआ. मेवाड, मारवाड और राजस्थान के अन्य विभागों में, और आसपास के सभी प्रदेशों में राजपूतों के कारण जैन धर्म एक जन धर्म बन गया. - [भारत क्यों है इस देश का नाम?](https://jainmission.theywon.in/bharat-desh/): हिंदु परंपरा के प्रमुख पुराण ग्रन्थ और प्राचीन जैन साहित्य में चक्रवर्ती भरत का विस्तार से वर्णन किया गया है, और यह भी कहा गया है कि इस देश का भारतवर्ष यह नाम इसी ऋषभ पुत्र भरत के नाम पर प्रचलित हुआ. - [Vihar: भगवान महावीर के चातुर्मास और विहार](https://jainmission.theywon.in/mahaveer-varshavas/): ऐसा दिखाई देता है की भगवान  महावीर ने अधिकतर वर्षाकाल मुख्य रूप से बिहार और आसपास बितायें. लेकिन उन्होंने इससे विस्तृत प्रदेशों में  विहार किया था. साधना के ग्यारहवें वर्ष में उन्होंने उत्तर प्रदेश के वाराणसी, श्रावस्ती और कौशांबी इन नगरों को भेंट दी थी, और उसके बाद भी कई बार उत्तर प्रदेश के कई नगरों में विहार किया था. - [यादव वंश का इतिहास और जैन धर्म | यदुवंशी जैन](https://jainmission.theywon.in/yadav-jain/): प्राचीन भारत के कई वंश बाद में लुप्त हो गये, लेकिन यादव वंश के वंशज आज भी बड़ी संख्या में दिखाई देते है. यह पूरे भारत में फैले हुये है. उत्तर प्रदेश, बिहार में यादव यह एक बड़ी जाती है. आज के भारत में यादवों के अलावा अहीर, भट्टी रजपूत, पंजाब के सैनी, महाराष्ट्र के जाधव, राजपूतों के जादोन, जडेजा आदि कुल के लोग यदु के वंशज है. - [पाइथागोरस पर जैन दर्शन का प्रभाव | Pythagoras](https://jainmission.theywon.in/pythagoras-jainism/): महावीर सांगलीकर jainway@gmail.com पाइथागोरस कौन थे? पाइथागोरस एक यूनानी दार्शनिक और एक महान गणिति थे. उनका जन्म 570 ईसा पूर्व में ग्रीस के समोस द्वीप पर हुआ था. उनके ज्यामितीय प्रमेय और सिद्धांत आज भी स्कूलों में पढ़ाये जाते हैं. इसके अलावा उन्हें आधुनिक अंकशास्त्र (Numerology) के जनक के रूप में जाना जाता है.  उनकी संगीत में भी गहरी रूचि थी और वह कहते थे कि संगीत और गणित का नजदीकी संबध है.   वह एक धार्मिक आंदोलन के संस्थापक थे, जिसे  पाइथागोरसवाद (Pythagoreanism) के नाम से जाना जाता है. इस वाद के अनुयायियों को पाइथागोरसगोरिअन्स (Pythagoreans) इस नाम से जाना जाता था.  पाइथागोरसवाद […] - [जैन धर्म का पतन कैसे हुआ?](https://jainmission.theywon.in/decline-of-jainism/): अक्सर यह माना जाता है कि जैन धर्म का पतन शैव और वैष्णव धर्म के बलशाली होने से, राजाश्रय बंद होने के कारण हो गया. यह आरोप किया जाता है कि आदि शंकराचार्य, रामानुजन आदि शैव और वैष्णव आचार्यों ने जैन आचार्यों को वाद-विवाद में पराजित किया या बल से जैनियों का धर्मपरिवर्तन किया, जैन धर्म को नष्ट कर दिया, जैन मंदिरों को शैव या वैष्णव मंदिरों में परिवर्तित किया गया. लेकिन हम जब टाईम लाईन देखते हैं, तब यह सब आरोप झूठे साबित हो जाते हैं. - [पराक्रमी रानी अब्बक्का | Queen Abbakka](https://jainmission.theywon.in/queen-abbakka/): महावीर सांगलीकर jainway@gmail.com तुलनाडु के चौटा राजवंश की अब्बक्का रानी (1525-1570) ने सोलहवीं सदी में पुर्तगालियों को कई बार पराजित किया. पुर्तगालियों की सेना और नौसेना को एकसाथ हराने वाली चौटा रानी अब्बक्का का पराक्रम आश्चर्यचकित करने वाला है. रानी अब्बक्का यूरोपीय उपनिवेशवादियों के खिलाफ लड़ने वाली पहली भारतीय थी. उसने पुर्तगालियों की राजनीतिक और व्यावसायिक महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश लगाया. अब्बक्का के कारण पुर्तगाली कर्नाटक में अपने पैर नहीं जमा सके. तुलूनाडू का चौटा राजवंश कर्नाटक और केरल के तुलु भाषी क्षेत्र को तुलुनाडु के नाम से जाना जाता है. तुलनाडु कर्नाटक में दक्षिण कॅनरा व उडपी जिले और केरल […] - [आध्यात्मिक ऊर्जा से भरे थे आचार्य विद्यासागर](https://jainmission.theywon.in/acharya-vidyasagar-narednra-modi/): संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज की इच्छा थी कि हमारे युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले, जो हमारे सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित हो. वह अक्सर कहा करते थे कि चूंकि हम अपने अतीत के ज्ञान से दूर हो गये हैं, इसलिए वर्तमान में हम अनेक बड़ी चुनौतियों से जूझ रहे हैं. अतीत के ज्ञान में वो आज की अनेक चुनौतियों का समाधान देखते थे - [जब एक महिला सैनिक ने जैन धर्म...](https://jainmission.theywon.in/sadhvi-siddhali-shree/): साध्वी सिद्धाली श्री जी एक महान लेखिका भी है. उन्होंने अध्यात्म, धर्म, दर्शन, व्यक्तिमत्व विकास आदि विषयों पर बहुत कुछ लिखा है और लिखती रहती है. उनके ब्लॉग पर ऐसे विषयों पर सेंकडो लेख प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी ’31 Days to a Changed You’ यह पुस्तक अमरीका में एक लोकप्रिय पुस्तक है. उनका पियानो संगीत अल्बम Songs of the Sadhvi ध्यान धारणा के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ है. ## Pages - [तीर्थक्षेत्र](https://jainmission.theywon.in/teerths/) - [इतिहास](https://jainmission.theywon.in/history/) - [फूड कॉर्नर](https://jainmission.theywon.in/%e0%a4%ab%e0%a5%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%b0/) - [सामाजिक](https://jainmission.theywon.in/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95/) - [संपर्क](https://jainmission.theywon.in/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95/) - [जैन मिशन](https://jainmission.theywon.in/%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8/) [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)