महावीर सांगलीकर
एक छोटे से गांव में एक सीधा-सादा किसान रहता था. खेती उसकी रोज़ी-रोटी थी, लेकिन सिर्फ खेती से घर चलाना मुश्किल था. इसलिए उसने एक गाय पाल रखी थी. वह गाय सच में किस्मत वाली थी, खूब दूध देती थी. दूध का कुछ हिस्सा घर में काम आता और बाकी किसान बेच देता, जिससे घर का खर्च ठीक-ठाक चल जाता.
किसान और उसकी पत्नी उस गाय को जानवर नहीं, अपने परिवार का सदस्य मानते थे. उसे भरपूर चारा देते, प्यार से बात करते, रोज़ नहलाते. खास बात यह थी कि वे गाय को कभी बांधकर नहीं रखते थे. गाय को पूरी आज़ादी थी. वह दिनभर खेतों में घूमती, मनपसंद घास खाती और शाम ढले खुद-ब-खुद घर लौट आती.
एक दिन अचानक उस घर में एक बिल्ली आ टपकी. दुबली-पतली, मासूम सी. किसान की पत्नी को उस पर दया आ गई. उसने एक कटोरी में दूध डालकर बिल्ली को पिला दिया. बस फिर क्या था, बिल्ली ने उसी घर को अपना ठिकाना बना लिया. धीरे-धीरे वह भी परिवार का हिस्सा बन गई. वैसे वह कोई काम नहीं करती थी, बस दिन में दो बार दूध पीती, धूप में आलस से फैलकर सोती और कभी-कभी म्याऊं-म्याऊं करके अपनी मौजूदगी दर्ज करा देती.
गाय और बिल्ली में भी अच्छी दोस्ती हो गई. कभी बिल्ली गाय के पास बैठ जाती, कभी गाय उसे सूंघकर प्यार जता देती. सब कुछ बड़े सुकून से चल रहा था.
लेकिन फिर एक दिन सब बदल गया.
एक शाम किसान मोबाइल पर यू-ट्यूब देख रहा था. अचानक उसे एक वीडियो दिखा, जिसमें बताया जा रहा था कि दूध पीने की वजह से गायों पर कितने अत्याचार होते हैं. वीडियो भावुक था, डरावना था. किसान ने पूरा वीडियो देख लिया. फिर उसी जैसे और वीडियो आने लगे. एक के बाद एक. विगन विचारधारा ने उसके दिमाग पर ऐसा असर किया कि उसने उसी दिन दूध पीना बंद करने का फैसला कर लिया.
उसने पत्नी से कहा, अब से घर में कोई दूध नहीं पिएगा. यह हिंसा है. इतना ही नहीं, उसने बिल्ली को दूध देना भी बंद कर दिया.
अब सवाल था गाय का. किसान बोला, इसे बेचना तो पाप है. जंगल में छोड़ दें तो जान का खतरा है. काफी सोचने के बाद उसने गाय को अपने एक किसान मित्र के पास दे दिया, यह सोचकर कि वहां वह सुरक्षित रहेगी.
घर में हालात बदलने लगे.
दूध न मिलने पर बिल्ली ने अपना तरीका बदल लिया. अब वह चूहे पकड़कर खाने लगी. पहले जो आराम से दूध पीती थी, अब शिकार करने लगी.
उस किसान में भी धीरे-धीरे अजीब बदलाव होने लगे. उसका शरीर दुबला होने लगा, चेहरे की चमक चली गई. वह हर वक्त उदास और चिड़चिड़ा रहने लगा. छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ जाता. दूध पीने वालों को वह मूर्ख और तुच्छ समझने लगा. जहां मौका मिलता, उनका मज़ाक उड़ाता, अपमान करता. इस वजह से दो-तीन बार गांव में उसकी पिटाई भी हो गई, लेकिन उसका अहंकार कम नहीं हुआ.
इसी बीच उसकी पत्नी गर्भवती थी. एक दिन अचानक उसे चक्कर आया और वह गिर पड़ी. घबराया हुआ किसान उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले गया. डॉक्टर ने जांच की, ढेर सारे सवाल पूछे.
फिर डॉक्टर ने सख्त लहजे में कहा, यह सब अचानक विगन बनने का नतीजा है. अगर तुम अपनी बीवी और उसके पेट में पल रहे बच्चे की भलाई चाहते हो, तो यह ज़िद छोड़ दो. नहीं तो बच्चा कमजोर या अपंग भी पैदा हो सकता है.
यह सुनते ही किसान के पैरों तले ज़मीन खिसक गई. डर के मारे उसने उसी पल फैसला कर लिया कि वह अपनी गाय वापस लाएगा.
वह अपने मित्र के घर जाने ही वाला था कि उसीका फोन आ गया. उधर से आवाज़ आई, भाई, अजीब बात है. तुम्हारी गाय भाग गई. कहीं तुम्हारे घर तो वापस नहीं आ गई?
यह सुनकर किसान सन्न रह गया. उसने तुरंत अपने मित्र के साथ मिलकर गाय को ढूंढना शुरू किया. गांव, खेत, रास्ते, सब जगह खोजा. लेकिन गाय कहीं नहीं मिली.
गाय गई कहां?
बाद में पता चला की उस परिसर में रस्तेपर घूमने वाली कई गायों को कुछ अनजाने लोग एक ट्रक में लादकर ले गए थे.
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…”One of the eye opening story!
Proud of your literary way of Awareness Mahavir S. Sir! Keep it Up!!! GB UA! TC! ATB!
Very nicely narrated & expressed thoughtfully!!!
The real Healthy Vegetarian Milk- Awareness to be understood & very specific need of intermittent fasting vegan need also to be digested with real eternal wisdom of life & Basic essential knowledge of Dietitics!!!
Whoever understand healthy childhood nourishment ways of Krishna would never give up on Milk & or would not force any veganism or any trendy isms without properly self deep understanding about the same!!!
Raadhe Krishna! Nanda (Aanand) Yashoda Krishna!!! Jay Krishna!!!😊❤️🙏👍🎵🎶🎵🎶🔥💐☺️💞🎁🎉🍯🥛🍼🍵🧉🍶🍦🍫🍮🥧🍯🥛🍼🍯🍽️🍱🍽️🎶🎵🎶🎵🙏👍
Be Happy! Be Healthy!! Be Peaceful!!”
Adv. Supriya Laxman Rakh.