सिर्फ सम्प्रदायवाद नहीं, जैन समाज में जातिवाद और प्रांतवाद भी है!

लेकिन जैन समाज की समस्या केवल संप्रदायवाद तक सीमित नहीं है. इसके साथ-साथ जातिवाद, प्रांतवाद और भाषावाद भी बड़ी मात्रा में मौजूद हैं. इन सभी…

धर्मपाल जैन समाज : एक आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक परिवर्तन की गाथा

धर्मपाल जैन समाज केवल एक धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान, नैतिक पुनर्जागरण और आत्मिक परिवर्तन का आंदोलन है. आचार्य श्री नानालालजी महाराज के जीवन…

दान, अहंकार और जैन समाज की बदलती मानसिकता

अर्थात् धन का सदुपयोग दान और भोग है, संचय दुःख का कारण है. दान से पुण्य की प्राप्ति होती है, संचय से जन्म-मरण का चक्र…
24 तीर्थंकरों के प्राकृत नाम | चउवीस तित्थयर णामाणि | 24 Teerthankar Names

24 तीर्थंकरों के प्राकृत नाम | चउवीस तित्थयर णामाणि | 24 Teerthankar Names

आज हम जैन तीर्थंकरों को जिन नामों से जानते है, वह उनके मूल नाम नहीं है. मूल नाम प्राकृत भाषा के है. बाद में इनको…
जैन धर्म

जैन मिशन वेबसाइट की मदद कीजिए

जैन मिशन वेबसाइट हिंदी और अंग्रेज़ी — इन दो भाषाओं में उपलब्ध है. दोनों वेबसाइटें अलग-अलग हैं. दोनों वेबसाइटों पर मिलाकर अब तक 100 से…

चतुर्थ जैन समाज का इतिहास

चतुर्थ मुख्य रूप से दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक में बसे हुए हैं. खास तौर पर सांगली, कोल्हापुर, बेलगावी (बेलगाम), सोलापुर, हुबली और बीजापुर जिलों…

निर्दोष दृष्टि: उपदेशों के पीछे छुपा रहस्य

इसलिए विनती है कि चाहे कोई गृहस्थ हो या संन्यासी, जैन हो या किसी और धर्म का हो, अगर आपके पास ऐसी निर्दोष दृष्टि है…

जैन परंपरा में योग

जैनों और श्रमण आंदोलन के आचार्यों के लिए प्रारंभ में योग का अर्थ ही व्रत था. व्रत, जिसमें विशेष साधनाएं आवश्यक थीं, संभवतः योग का…