ध्यान किया नहीं जाता, हो जाता है!
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ध्यान कोई क्रिया नहीं है जिसे किया जाए. आम तौर पर हमें कहा जाता है, इस पर ध्यान करो,…
गुरु-शिष्य परंपरा से गुरु–भक्त परंपरा तक : जैन समाज की अवनति का मूल कारण
गुरु–शिष्य परंपरा में शिष्य गुरु के दोष भी देखता था और उनसे सीख लेकर स्वयं को सुधारता था. गुरु भी जानता था कि शिष्य अंधा…
मनुष्य की पीड़ा पर कब बोलेंगे जैन लोग?
अगर अहिंसा केवल थाली और रसोई तक सीमित रह जाए, और युद्ध, हत्या व नरसंहार पर मौन साध लिया जाए, तो ऐसी अहिंसा खोखली बन…
साधुता की आड़ में सिद्धांतों की हत्या: महावीर के नाम पर सबसे बड़ा अपराध
आज साधु का मूल्यांकन साधना से नहीं, प्रचार से होता है. जिसके पास माइक है, वही महान; जिसके पास कॅमेरा है, वही पूज्य. जो आडंबर…
सामुदायिक विवाह आंदोलन: समय की जरूरत
एक ही स्थान पर आयोजित होने वाले सामुदायिक विवाह समारोहों से समाज का पैसा सार्थक और पुण्य कार्यों में उपयोग हो सकता है. कोरोना काल…
महावीर और उनके अनुयायी
महावीर शोषण, गुलामी, हिंसा, झूठ, चोरी, परिग्रह जैसी बातो के खिलाफ थे. आजकल के जैन साधू और लोग सिर्फ हिंसा के खिलाफ ही बोलते है,…
मोक्ष की बातें करने वालों.…
जैन दर्शन स्पष्ट कहता है कि राग–द्वेष ही बंधन का मूल कारण है. अब ईमानदारी से खुद से पूछो—दिगंबर और श्वेताम्बर का यह झगड़ा क्या…
नए ज़माने में नए जैन धर्म की ज़रूरत
आज जैन धर्म का मतलब बहुत हद तक खाने-पीने की पाबंदियों, लंबे उपवासों और कुछ खास नियमों तक सीमित हो गया है. कई बार ऐसा…
- « Previous Page
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
- …
- 12
- Next Page »