Author: jainmission.theywon.in
दान, अहंकार और जैन समाज की बदलती मानसिकता
अर्थात् धन का सदुपयोग दान और भोग है, संचय दुःख का कारण है. दान से पुण्य की प्राप्ति होती है, संचय से जन्म-मरण का चक्र…
24 तीर्थंकरों के प्राकृत नाम | चउवीस तित्थयर णामाणि | 24 Teerthankar Names
आज हम जैन तीर्थंकरों को जिन नामों से जानते है, वह उनके मूल नाम नहीं है. मूल नाम प्राकृत भाषा के है. बाद में इनको…
जैन मिशन वेबसाइट की मदद कीजिए
जैन मिशन वेबसाइट हिंदी और अंग्रेज़ी — इन दो भाषाओं में उपलब्ध है. दोनों वेबसाइटें अलग-अलग हैं. दोनों वेबसाइटों पर मिलाकर अब तक 100 से…
चतुर्थ जैन समाज का इतिहास
चतुर्थ मुख्य रूप से दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक में बसे हुए हैं. खास तौर पर सांगली, कोल्हापुर, बेलगावी (बेलगाम), सोलापुर, हुबली और बीजापुर जिलों…
निर्दोष दृष्टि: उपदेशों के पीछे छुपा रहस्य
इसलिए विनती है कि चाहे कोई गृहस्थ हो या संन्यासी, जैन हो या किसी और धर्म का हो, अगर आपके पास ऐसी निर्दोष दृष्टि है…
जैन परंपरा में योग
जैनों और श्रमण आंदोलन के आचार्यों के लिए प्रारंभ में योग का अर्थ ही व्रत था. व्रत, जिसमें विशेष साधनाएं आवश्यक थीं, संभवतः योग का…
ईरान का राजकुमार आर्द्रक बन गया जैन मुनि
प्राचीन समय में जैन धर्म का प्रचार-प्रसार भारत की सरहदों से बाहर, ईरान तक पहुंच चुका था. इसका एक पक्का उदाहरण मिलता है. ईरान में…
सिंधिया वंश और जैन धर्म
इतिहास में सिंधिया कुल की कई शाखाएं रही हैं, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में शासन किया. इनमें करहाटक (आज का कराड, दक्षिण महाराष्ट्र), जुन्नर (पुणे के…
- 1
- 2
- 3
- …
- 12
- Next Page »