दान, अहंकार और जैन समाज की बदलती मानसिकता

अर्थात् धन का सदुपयोग दान और भोग है, संचय दुःख का कारण है. दान से पुण्य की प्राप्ति होती है, संचय से जन्म-मरण का चक्र…