चतुर्थ जैन समाज का इतिहास

चतुर्थ मुख्य रूप से दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक में बसे हुए हैं. खास तौर पर सांगली, कोल्हापुर, बेलगावी (बेलगाम), सोलापुर, हुबली और बीजापुर जिलों…

जैन परंपरा में योग

जैनों और श्रमण आंदोलन के आचार्यों के लिए प्रारंभ में योग का अर्थ ही व्रत था. व्रत, जिसमें विशेष साधनाएं आवश्यक थीं, संभवतः योग का…

ईरान का राजकुमार आर्द्रक बन गया जैन मुनि

प्राचीन समय में जैन धर्म का प्रचार-प्रसार भारत की सरहदों से बाहर, ईरान तक पहुंच चुका था. इसका एक पक्का उदाहरण मिलता है. ईरान में…

सिंधिया वंश और जैन धर्म

इतिहास में सिंधिया कुल की कई शाखाएं रही हैं, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में शासन किया. इनमें करहाटक (आज का कराड, दक्षिण महाराष्ट्र), जुन्नर (पुणे के…
बॅरिस्टर वीरचंद गांधी

बॅरिस्टर वीरचंद गांधी: धर्मों के बीच एक सेतु

इस भाषण के बाद वीरचंद गांधी को अमेरिका के कई शहरों में व्याख्यान देने के निमंत्रण मिलने लगे. उनके विचारों से लोगों में जैन दर्शन,…
आदिवासी जैन

क्या आदिवासियों का मूल धर्म जैन है ?

आदिवासी समुदाय के जैन होने का एक अकाट्य प्रमाण यह है कि आदिवासी क्षेत्र के जंगलो में प्रचुर मात्रा में तीर्थंकर मूर्तियों का होना. बंगाल…

महावीर और उनके अनुयायी

महावीर शोषण, गुलामी, हिंसा, झूठ, चोरी, परिग्रह जैसी बातो के खिलाफ थे. आजकल के जैन साधू और लोग सिर्फ हिंसा के खिलाफ ही बोलते है,…

भगवान ऋषभदेव, अयोध्या और इक्ष्वाकु परंपरा

अयोध्या और उसके आसपास ऋषभदेव से संबंधित अनेक पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं. शाहजूरण का टीला, मणि पर्वत, अनंतनाथ की टोक, ग्रेवेयर और ब्लैकवेयर मृदभांड, 2400…