Category: समाज
क्या आदिवासियों का मूल धर्म जैन है ?
आदिवासी समुदाय के जैन होने का एक अकाट्य प्रमाण यह है कि आदिवासी क्षेत्र के जंगलो में प्रचुर मात्रा में तीर्थंकर मूर्तियों का होना. बंगाल…
संत समाज और वाणी संयम: आस्था, मर्यादा और ज़िम्मेदारी का सवाल
यह समझना ज़रूरी है कि यह सवाल केवल संत समाज का नहीं है, बल्कि पूरे समाज का है. अगर संत अपनी वाणी और आचरण से…
घर–परिवार छोड़ा, पर महत्वाकांक्षाएं नहीं छोड़ी
अहंकार का यही रूप आगे चलकर असहिष्णुता बनता है. जो सच बोले, उसे धमकाना. जो प्रश्न करे, उसे विद्रोही ठहराना. और जो न झुके, उसके…
गुरु-शिष्य परंपरा से गुरु–भक्त परंपरा तक : जैन समाज की अवनति का मूल कारण
गुरु–शिष्य परंपरा में शिष्य गुरु के दोष भी देखता था और उनसे सीख लेकर स्वयं को सुधारता था. गुरु भी जानता था कि शिष्य अंधा…
मनुष्य की पीड़ा पर कब बोलेंगे जैन लोग?
अगर अहिंसा केवल थाली और रसोई तक सीमित रह जाए, और युद्ध, हत्या व नरसंहार पर मौन साध लिया जाए, तो ऐसी अहिंसा खोखली बन…
सामुदायिक विवाह आंदोलन: समय की जरूरत
एक ही स्थान पर आयोजित होने वाले सामुदायिक विवाह समारोहों से समाज का पैसा सार्थक और पुण्य कार्यों में उपयोग हो सकता है. कोरोना काल…
महावीर और उनके अनुयायी
महावीर शोषण, गुलामी, हिंसा, झूठ, चोरी, परिग्रह जैसी बातो के खिलाफ थे. आजकल के जैन साधू और लोग सिर्फ हिंसा के खिलाफ ही बोलते है,…
मोक्ष की बातें करने वालों.…
जैन दर्शन स्पष्ट कहता है कि राग–द्वेष ही बंधन का मूल कारण है. अब ईमानदारी से खुद से पूछो—दिगंबर और श्वेताम्बर का यह झगड़ा क्या…
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