Category: समाज
गुरु-शिष्य परंपरा से गुरु–भक्त परंपरा तक : जैन समाज की अवनति का मूल कारण
गुरु–शिष्य परंपरा में शिष्य गुरु के दोष भी देखता था और उनसे सीख लेकर स्वयं को सुधारता था. गुरु भी जानता था कि शिष्य अंधा…
मनुष्य की पीड़ा पर कब बोलेंगे जैन लोग?
अगर अहिंसा केवल थाली और रसोई तक सीमित रह जाए, और युद्ध, हत्या व नरसंहार पर मौन साध लिया जाए, तो ऐसी अहिंसा खोखली बन…
सामुदायिक विवाह आंदोलन: समय की जरूरत
एक ही स्थान पर आयोजित होने वाले सामुदायिक विवाह समारोहों से समाज का पैसा सार्थक और पुण्य कार्यों में उपयोग हो सकता है. कोरोना काल…
महावीर और उनके अनुयायी
महावीर शोषण, गुलामी, हिंसा, झूठ, चोरी, परिग्रह जैसी बातो के खिलाफ थे. आजकल के जैन साधू और लोग सिर्फ हिंसा के खिलाफ ही बोलते है,…
मोक्ष की बातें करने वाले सुन लो… पहले अपना भेद तो छोड़ो!
जैन दर्शन स्पष्ट कहता है कि राग–द्वेष ही बंधन का मूल कारण है. अब ईमानदारी से खुद से पूछो—दिगंबर और श्वेताम्बर का यह झगड़ा क्या…
नए ज़माने में नए जैन धर्म की ज़रूरत
आज जैन धर्म का मतलब बहुत हद तक खाने-पीने की पाबंदियों, लंबे उपवासों और कुछ खास नियमों तक सीमित हो गया है. कई बार ऐसा…
ग्लोबल वॉर्मिंग, वीगन एक्टिविज़्म और एक वास्तविकता
वैज्ञानिक अध्ययनों से साफ़ पता चलता है कि हम क्या खाते हैं, इससे पर्यावरण पर पड़ने वाला असर बहुत बदल जाता है. जो लोग मांस…
शाकाहारी लोगों को वेगन नहीं बनना चाहिए
बच्चों के लिए तो यह और भी खतनाक है. उनकी हड्डियां, दिमाग और शरीर बहुत तीव्र गति से बढ़ते हैं. उन्हें प्रचुर प्रोटीन, कैल्शियम और…
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