Category: जैन दर्शन
निर्दोष दृष्टि: उपदेशों के पीछे छुपा रहस्य
इसलिए विनती है कि चाहे कोई गृहस्थ हो या संन्यासी, जैन हो या किसी और धर्म का हो, अगर आपके पास ऐसी निर्दोष दृष्टि है…
जैन परंपरा में योग
जैनों और श्रमण आंदोलन के आचार्यों के लिए प्रारंभ में योग का अर्थ ही व्रत था. व्रत, जिसमें विशेष साधनाएं आवश्यक थीं, संभवतः योग का…
ईरान का राजकुमार आर्द्रक बन गया जैन मुनि
प्राचीन समय में जैन धर्म का प्रचार-प्रसार भारत की सरहदों से बाहर, ईरान तक पहुंच चुका था. इसका एक पक्का उदाहरण मिलता है. ईरान में…
धर्म के नाम पर धोखा: बाहरी तपस्या की कड़वी सच्चाई
यह बात सुनकर शायद आपको आश्चर्य हो, लेकिन सच्चाई यह है कि भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर स्वामी तक, किसी भी तीर्थंकर ने बाहरी…
हमारे जीवन में बार-बार रुकावटें क्यों आती हैं?
इसका कारण बहुत स्पष्ट है. हमने कभी न कभी, इस भव में या पूर्व भव में, किसी न किसी के जीवन में, उसके कार्य में,…
ध्यान किया नहीं जाता, हो जाता है!
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ध्यान कोई क्रिया नहीं है जिसे किया जाए. आम तौर पर हमें कहा जाता है, इस पर ध्यान करो,…
मोक्ष की बातें करने वाले सुन लो… पहले अपना भेद तो छोड़ो!
जैन दर्शन स्पष्ट कहता है कि राग–द्वेष ही बंधन का मूल कारण है. अब ईमानदारी से खुद से पूछो—दिगंबर और श्वेताम्बर का यह झगड़ा क्या…
यीशु मसीह और जैन धर्म
कुछ इतिहासकार मानते है की यीशु मसीह अपनी युवावस्था में आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए भारत आए थे. इस मान्यता के अनुसार, यीशु मसीह…